पर्यावरण के नुक़सान पर चाहे वायु प्रदूषण हो, ध्वनि प्रदूषण हो, जल प्रदूषण हो या भूमि प्रदूषण, सबमें व्यवसाय की भागीदारी होती है। व्यवसाय निम्नलिखित तरीकों से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ाता है : === उत्पादन इकाईयों से निकलने वाली गैसों और धुएं से, मशीनों, वाहनों आदि के उपयोग से ध्वनि प्रदूषण के रूप में, औद्योगिक इकाईयों को स्थापित करने के लिए वनों की कटाई से, औद्योगिकीकरण तथा शहरीकरण के विकास से, नदियों तथा नहरों में कचरे तथा हानिकारक पदार्थों के विसर्जन से, ठोस कचरे को खुली हवा में फेंकने से, खनन तथा खदान संबंधी गतिविधियों से, परिवहन के बढ़ते हुए उपयोग से । पर्यावरण को नियंत्रित करने में व्यवसाय की तीन प्रकार की भूमिका हो सकती हैः निवारणात्मक, उपचारात्मक तथा जागरूकता। निवारण 👇👇👇👇 इसका अर्थ है कि व्यावसायिक इकाईयाँ ऐसा कोई भी कदम न उठाए, जिससे पर्यावरण को और अधिक हानि हो। इसके लिए आवश्यक है कि व्यवसाय सरकार द्वारा लागू ...