परमात्मा आयु बढ़ा देता है।
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‘‘पूर्ण परमात्मा साधक को भयंकर रोग से मुक्त करके
आयु बढ़ा देता है‘‘
भक्त डा. ओम प्रकाश हुड्डा (ब्ण्डण्व्ण्) का प्रमाण
प्रमाण ऋग्वेद मंडल 10 सूक्त 161 मंत्रा 1, 2 तथा 5 जिसमें परमेश्वर कहता
है कि यदि किसी को प्रत्यक्ष या गुप्त क्षय रोग तपेदिक हो उसे भी ठीक करता
हूँ तथा यदि किसी रोगी व्यक्ति की प्राण शक्ति क्षीण हो चुकी हो। जिसकी आयु
शेष न रही हो तेरे प्राणों की रक्षा करूं तथा तेरी आयु सौ वर्ष प्रदान कर दूं, सर्व
सुख प्रदान करूं। मंत्रा 5 में कहा है कि हे पुनर्जीवन प्राप्त प्राणी ! तू सर्व भाव से
मेरी शरण ग्रहण कर। यदि पाप कर्म दण्ड के कारण तेरी आँखें भी समाप्त होनी
हों तो मैं तुझे पुनर् आजीवन आँखें दान कर दूं। तुझे रोग मुक्त करके सर्व अंग
प्रदान करूं तथा तुझे प्राप्त होऊं अर्थात् मिलुं।
जम जौरा जासे डरें, मिटें कर्म के लेख।
अदली अदल कबीर हैं, कुल के सतगुरु एक।।
उपरोक्त पंक्तियाँ मेरे जीवन में पूर्ण रूप से सत्य घटित हुई।
मैं भक्त डॉ. ओमप्रकाश हुड्डा (ब्ण्डण्व्ण् . डण्ठण्ठण्ैण्ए डण्ैण्;म्लम ेचमबपंसपेजद्धए 18 ।ए
सरकुलर रोड़ रोहतक में रहता हूँ। मेरा मोबाईल नं. 9813045050 है। मेरा जन्म
12 अप्रैल 1953 को गाँव किलोई जिला-रोहतक में हुआ। मेरी पाँचवी से बारहवीं
कक्षा तक की पढ़ाई क्ण्।ण्टण् स्कूल व क्ण्।ण्टण् कॉलेज अमृतसर में हुई। अमृतसर में
मेरे बड़े भाई स्पइतंतपंद के पद पर क्ण्।ण्टण् स्कूल में कार्यरत थे। वहाँ के जानकार
लोग उन्हें मास्टर जी तथा मुझे प्यार से छोटे मास्टर जी कहते थे। जब मैं छठी
कक्षा में पढ़ता था तो मुझे एक महात्मा ने जो कि दुरग्याना मन्दिर अमृतसर में
सेवक था, ने मेरी हस्तरेखा देखकर बताया कि छोटे मास्टर जी आप डॉक्टर बनोगे
तथा तुम्हारी आयु केवल पचास वर्ष है। यह कहते हुए यह भय हुआ कि बच्चे को
यह सच्चाई बताकर गलत कर दिया, लेकिन मैंने महात्मा की बातों को एक बच्चे
की भांति सुना अनसुना कर दिया। मैं बड़ा होकर डॉक्टर बना तथा मैंने डण्ठण्ठण्ैण्
तथा डण्ैण् ;म्लम ेचमबपंसपेजद्ध भी च्ण्ळण्प्ण् डण्ैण् रोहतक से की है।
ठीक पचासवां वर्ष जब पूरा होना था यानी 10ध्11 अप्रैल 2003 की रात बारह
बजे के करीब उस दिन मैं सपरिवार रोहतक में ही था तो मुझे दोनों हाथों में दर्द
तथा सीने में भारीपन शुरु हुआ और हम उपचार के लिए च्ण्ळण्प्ण् डण्ैण् में चले गए।
इससे पहले मुझे न ही ब्लड प्रेशर रहता था और न ही मुझे शुगर की बीमारी थी।
मैंने नाम लेने से पहले पच्चीस वर्ष लगातार धूम्रपान अवश्य किया था।
वहाँ ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को मैंने परिचय दिया कि भ्ण्ब्ण्डण्ैण्प्ण् ;ळतवनच ।द्ध
श्रेणी में मैं एस.एम.ओ. के पद पर तैनात हूँ। (उस समय ैण्डण्व् वर्तमान में ब्ण्डण्व्ण्)
परिचय देने के बाद डॉक्टर ने तुरन्त उचित निरिक्षण के बाद मेरा ईलाज शुरु कर
दिया और प्दजमदेपअम ब्ंतम न्दपज में शिफ्ट करने तक मुझे सभी गतिविधियाँ पता
रही। लेकिन प्ण्ब्ण्न्ण् में शिफ्ट करने के कुछ समय बाद से मुझे कुछ मालूम नहीं कि
आगे क्या हुआ ? लगभग डेढ़ दो घण्टे के पश्चात मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मुझे
काल के दूत चारों तरफ से घेर कर खडे हैं और मुझे कह रहे हैं कि चलो तुम्हारा
समय पूरा हो चुका है, हम तुम्हें लेने आए हैं। मैं उनको कुछ भी नहीं कह पाया
था कि तभी पूर्ण परमेश्वर कबीर साहेब मेरे सतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी
महाराज के रूप में मेरे बैड के पास प्रकट हुए तो वे काल के दूत जिनका चेहरा
डरावना तथा शरीर डील-डोल था, महाराज जी को देखते ही अदृश्य हो गए।
मेरे सतगुरु देव ने मुझे आशीर्वाद दिया तथा कहा कि कबीर परमेश्वर ने
आपकी आयु अपने कोटे से (अपनी शक्ति) से बढ़ा दी है ताकि आप अपनी भक्ति
पूरी कर सके और सतलोक जा सकें। मैंने रोकर कहा कि मालिक आप ही स्वयं
परमेश्वर हो, आपने इस चोले में अपने आपको छुपा रखा है, परमेश्वर भक्ति भी
आप ही करवाने वाले हो। मैं भक्ति करने वाला कौन होता हूँ ? इतना कहकर मेरी
आँखें खुल गई और मेरी आँखों में आसुंओं के सिवाए कुछ भी नहीं था। तीन दिन
बाद जब प्ण्ब्ण्न् से मुझे वार्ड में लाया जा रहा था तो मैं उठकर पैदल चलने लगा
तो एक डॉक्टर ने भाग कर मुझे पकड़ लिया तथा कहा कि क्या कर रहे हो ?
आपने पैदल बिल्कुल नहीं चलना, आपको हार्ट अटैक हुआ है।
स्पेशल वार्ड में शिफ्ट करने के बाद डॉक्टर ने मुझे बताया कि हम हैरान हैं
कि 10ध्11 तारीख की रात को आपकी म्ण्ब्ण्ळण्ध्ठण्च्ण् इत्यादि रिपोर्ट बता रही थी कि
आप बचने वाले नहीं हो, लेकिन सुबह आपकी म्ण्ब्ण्ळण् आदि फिर सामान्य शुरु हो
गई।
मैंने 25.12.1999 को तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से नामदान लिया
था। इससे पहले मैं ब्रह्मा कुमारी, जैनी, राधास्वामी का शिष्य रहा तथा क्ण्।ण्टण्
ैबीववसध्ब्वससमहम का छात्रा होने की वजह से आर्य समाज की अमिट छाप मुझ पर थी।
गायत्रा मंत्रा का जाप कई लाख बार किया होगा। घर में लगभग सैकड़ों फोटो सभी
देवी-देवताओं की थी। नामदान के बाद सभी देवी-देवताओं की फोटो जल प्रवाह
कर दी तथा सभी प्रकार की आन उपासना बंद कर दी तथा सतगुरु रामपाल जी
महाराज के आदेशानुसार पूर्ण परमात्मा कबीर परमेश्वर (कविर्देव) की भक्ति शुरु
कर दी। क्योंकि सतगुरु ने कहा है कि --
‘एकै साधै सब सधै, सब साधै सब जाए। माली सींचैं मूल को, फले-फूले अघाए।।‘
एक कबीर परमेश्वर की भक्ति में आरूढ़ होने से वह भी केवल तत्वदर्शी संत
से नाम लेने के बाद लाभ यह हुआ कि संत रामपाल जी महाराज ने अपने कोटे
से मेरी उम्र बढ़ा दी। यह बातें मैंने तथा मेरे परिवार के सदस्यों ने च्ण्ळण्प्ण्डण्ैण् में
कार्यरत डॉक्टर तथा दूसरे स्टॉफ के सदस्यों को बताई, लेकिन उनके समझ में एक
न आई। क्योंकि ये बातें समझ में उसी को आयेंगी जिनका चैनल परमेश्वर ऑन
करेंगे, अन्यथा संभव नहीं कि कोई इस ज्ञान को समझ सके।
मैंने 25.12.1999 को तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से नामदान लिया
तो मुझे मालूम नहीं था कि यही पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब ज्यों के त्यों अवतार आए
हुए हैं। लेकिन जब मेरे साथ उपरोक्त घटना घटित हुई तब मुझे यह विश्वास हो
माँसा घटे न तिल बढ़े, विधना लिखे जो लेख। साचा सतगुरु मेट कर ऊपर मारें मेख।
कबीर परमेश्वर सशरीर संत रामपाल जी महाराज के रूप में आए हुए हैं जो
सच्चे सतगुरु हैं और विधना (भाग्य) के पाप कर्मों रूपी लेख को मिटा कर अपनी
शक्ति से नये लेख लिख देते हैं।
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