Who is real god

Who is real god
कबीर परमात्मा असली राम है। क्योंकि वेदों में स्पष्ट लिखा है। कि वह पूर्ण प्रभु अविनाशी परमात्मा कविर्देव (कबीर साहेब) जी हैं जो सतलोक में रहते हैं। 

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📚 अवश्य जानियें :
● ब्रह्मा, विष्णु, महेश के माता-पिता कौन है?
● ब्रह्मा, विष्णु, महेश किसकी भक्ति करते है?
● शेरावाली माता (दुर्गा) का पति कौन है?
● हमको जन्म देने व मारने में किस प्रभु का स्वार्थ है?
● परमात्मा साकार है या निराकार?
● किसी गुरु की सरण में जाने से मुक्ति संभव है?
● पूर्ण संत की क्या पहचान है एवं पूर्ण मोक्ष कैसे मिलेगा?
● हम देवी-देवताओं की इतनी भक्ति करते है। फिर भी दुखी क्यों है?
● तीर्थ, वर्त, तर्पण, श्राद्ध निकालने से लाभ संभव है या नही?
● श्री कृष्ण जी काल नही थे! फिर गीता वाला काल कौन है?
● पूर्ण परमात्मा कौन है? कहाँ रहता है? कैसे मिलता है? किसने देखा है?
● समाधि अभ्यास राम, हरे कृष्ण, हरिओम, हंस, तीन व पाँच नामों तथा वाहेगुरु आदि-आदि नामों के जाप से सुख एवं मुक्ति संभव है या नहीं?
● वर्तमान समय में प्रसिद्ध भविस्यवक्ताओ के अनुसार वह महान संत कौन है?

🔉सुनिए सन्त रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन:
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● ईश्वर TV पर रात्रि 8:30 से 9:30 तक
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● कात्यायनी TV पर रात्रि 8:00 से 9:00 तक
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त्रादेवा (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) शाखा भये, पात भया संसार।।
कबीर, तीन देवको सब कोई ध्यावै, चौथा देवका मरम न पावै।
चौथा छांडि पँचम ध्यावै, कहै कबीर सो हमरे आवै।।
कबीर, तीन गुणन की भक्ति में, भूलि पर्यौ संसार।
कहै कबीर निज नाम बिन, कैसे उतरै पार।।
कबीर, ओंकार नाम ब्रह्म (काल) का, यह कर्ता मति जानि।
सांचा शब्द कबीर का, परदा माहिं पहिचानि।।
कबीर, तीन लोक सब राम जपत है, जान मुक्ति को धाम।
रामचन्द्र वसिष्ठ गुरु किया, तिन कहि सुनायो नाम।।
कबीर, राम कृष्ण अवतार हैं, इनका नाहीं संसार।
जिन साहब संसार किया, सो किनहु न जनम्यां नारि।।
कबीर, चार भुजाके भजनमें, भूलि परे सब संत।
कबिरा सुमिरै तासु को, जाके भुजा अनंत।।
कबीर, वाशिष्ट मुनि से तत्वेता ज्ञानी, शोध कर लग्न धरै।
सीता हरण मरण दशरथ को, बन बन राम फिरै।।
कबीर, समुद्र पाटि लंका गये, सीता को भरतार।
ताहि अगस्त मुनि पीय गयो, इनमें को करतार।।
कबीर, गोवर्धन कृष्ण जी उठाया, द्रोणागिरि हनुमंत।
शेष नाग सब सृष्टी उठाई, इनमें को भगवंत।।
गरीब, दुर्वासा कोपे तहां, समझ न आई नीच।
छप्पन कोटि यादव कटे, मची रूधिर की कीच।।
कबीर, काटे बंधन विपति में, कठिन किया संग्राम।
चीन्हों रे नर प्राणियां, गरुड बडो की राम।।
कबीर, कह कबीर चित चेतहू, शब्द करौ निरुवार।
श्री रामचन्द्र को कर्ता कहत हैं, भूलि पर्यो संसार।।
कबीर, जिन राम कृष्ण निरंजन किया, सो तो करता न्यार।
अंधा ज्ञान न बूझई, कहै कबीर बिचार।।
कबीर, तीन गुणन (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) की भक्ति में, भूल पड़यो संसार।
कहै कबीर निज नाम बिना, कैसे उतरो पार।।

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