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Who is real god

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Who is real god कबीर परमात्मा असली राम है। क्योंकि वेदों में स्पष्ट लिखा है। कि वह पूर्ण प्रभु अविनाशी परमात्मा कविर्देव (कबीर साहेब) जी हैं जो सतलोक में रहते हैं।  अधिक जानकारी के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित शास्त्रो से प्रमाणित पुस्तके ज्ञान गंगा, जीने की राह, गीता तेरा ज्ञान अमृत, अंध श्रद्धा भक्ति । इनमेे से किसी भी पुष्तक को आप अपने घर बेठे निशुल्क मंगा सकते है। हमे अपना पूरा नाम और पता इस Whatsapp No 9992600893 पर send करे। 📚 अवश्य जानियें : ● ब्रह्मा, विष्णु, महेश के माता-पिता कौन है? ● ब्रह्मा, विष्णु, महेश किसकी भक्ति करते है? ● शेरावाली माता (दुर्गा) का पति कौन है? ● हमको जन्म देने व मारने में किस प्रभु का स्वार्थ है? ● परमात्मा साकार है या निराकार? ● किसी गुरु की सरण में जाने से मुक्ति संभव है? ● पूर्ण संत की क्या पहचान है एवं पूर्ण मोक्ष कैसे मिलेगा? ● हम देवी-देवताओं की इतनी भक्ति करते है। फिर भी दुखी क्यों है? ● तीर्थ, वर्त, तर्पण, श्राद्ध निकालने से लाभ संभव है या नही? ● श्री कृष्ण जी काल नही थे! फिर गीता वाला काल कौन है? ● पूर्ण परमात्मा कौन है? कहाँ रहता...

Why does the epidemic come

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Why does the epidemic come Morning Desk: Corona virus spreading from China to the whole world has taken the form of an epidemic.  But even before this, the outbreak of epidemic in the world has been closely watched.  In 1720, the plague spread to Europe and in 1820, cholera in Asian countries took the form of an epidemic.  Exactly 100 years later in 1920, the Spanish flu wreaked havoc and now in 2020 the Corona people have emerged as a major epidemic.  Why do epidemics come every 100 years? History is witness that in the twentieth year of every century, a huge epidemic spreads in the world.  This year it has emerged as coronavirus, but four hundred years ago the plague epidemic came at this time.  And every century after that such epidemics have been coming at this time.  All these epidemics killed a large number of people.  Some made millions and some made millions.  This does not mean that a large number of people can be killed by coronav...

विज्ञानvs#ज्ञान

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विज्ञानvs#ज्ञान  #विज्ञान और #ज्ञान के बीच कोई आपसी टकराव नहीं है । दोनों अपने अपने यथास्थान पर स्थित हैं और अगर हम अपनी सोच का स्तर थोडा ऊँचा करके देखेंगे तो हम पाएंगे कि विज्ञान और भगवान दोनों एक दुसरे के पूरक हैं । ब्रह्माण्ड में जितने भी गृह नक्षत्र तारे बल उर्जा है । सारे कहीं न कही एक दुसरे से जुड़े हुए हैं । मगर विषय के तौर पर दोनों भिन्न हैं विज्ञान प्रमाणिक आधारो पर मिलने वाले वास्तविक ज्ञान का संग्रह है जबकि #ईश्वर अध्यात्म #धर्मशास्त्र और #आस्था का विषय है । 💫 #लेकिन विज्ञान अस्थाई है जबकि परमात्मा अजर अविनाशी है और विज्ञान परमात्मा की अनुकंपा से ही है। इसलिए कह सकते है कि #भगवान #सर्वोपरि है।ओर परमात्मा ही ज्ञान देते हैं  तभी ज्ञान आधार से सभी विज्ञान के कार्य सम्पन होते हैं भौतिक विज्ञान के सबसे बड़े scientist #Albert Einsteine भी इश्वर को मानते थे । उन्होंने अपनी General और Special दोनों theory में god doesn't play dice जैसे कई ईश्वरवाची शब्दों का प्रयोग करके उन्होंने ईश्वर कि मौजूदगी को भी स्वीकार है । और इतना ही नहीं #Albert_Einsteine भगवदगीता को भी...

History_Of_JagannathTemple

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History_Of_JagannathTemple एक बार  ”पुरी में श्री जगन्नाथ जी का मन्दिर अर्थात् धाम कैसे बना“ उड़ीसा प्रांत में एक इन्द्रदमन नाम का राजा था। वह भगवान श्री कृष्ण जी का अनन्य भक्त था। एक रात्रा को श्री कृष्ण जी ने राजा को स्वपन में दर्शन देकर कहा कि जगन्नाथ नाम से मेरा एक मन्दिर बनवा दे। श्री कृष्ण जी ने यह भी कहा था कि इस मन्दिर में मूर्ति पूजा नहीं करनी है। केवल एक संत छोड़ना है जो दर्शकों को पवित्रा गीता अनुसार ज्ञान प्रचार करे। समुद्र तट पर वह स्थान भी दिखाया जहाँ मन्दिर बनाना था। सुबह उठकर राजा इन्द्रदमन ने अपनी पत्नी को बताया कि आज रात्रा को भगवान श्री कृष्ण जी दिखाई दिए। मन्दिर बनवाने के लिए कहा है। रानी ने कहा शुभ कार्य में देरी क्या? सर्व सम्पत्ति उन्हीं की दी हुई है। उन्हीं को समर्पित करने में क्या सोचना है? राजा ने उस स्थान पर मन्दिर बनवा दिया जो श्री कृष्ण जी ने स्वपन में समुद्र के किनारे पर दिखाया था। मन्दिर बनने के बाद समुद्री तुफान उठा, मन्दिर को तोड़ दिया। निशान भी नहीं बचा कि यहाँ मन्दिर था। ऐसे राजा ने पाँच बार मन्दिर बनवाया। पाँचों बार समुद्र ने...

#BibleFacts_By_SaintRampalJi

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BibleFacts_By_SaintRampalJi ”पवित्रा बाईबल तथा पवित्रा कुरान शरीफ में सृष्टी रचना का प्रमाण“ इसी का प्रमाण पवित्रा बाईबल में तथा पवित्रा कुरान शरीफ में भी है। कुरान शरीफ में पवित्रा बाईबल का भी ज्ञान है, इसलिए इन दोनों पवित्रा सद्ग्रन्थों ने मिल-जुल कर प्रमाणित किया है कि कौन तथा कैसा है सृष्टी रचनहार तथा उसका वास्तविक नाम क्या है। पवित्रा बाईबल (उत्पत्ति ग्रन्थ पृष्ठ नं. 2 पर, अ. 1ः20 - 2ः5 पर) छटवां दिन :- प्राणी और मनुष्य : अन्य प्राणियों की रचना करके 26. फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं, जो सर्व प्राणियों को काबू रखेगा। 27. तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके मनुष्यों की सृष्टी की। 29. प्रभु ने मनुष्यों के खाने के लिए जितने बीज वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ों में बीज वाले फल होते हैं वे भोजन के लिए प्रदान किए हैं, (माँस खाना नहीं कहा है।) सातवां दिन :- विश्राम का दिन : परमेश्वर ने छः दिन में सर्व सृष्टी की उत्पत्ति की तथा ...

Evidence of Nature's Creation in Holy Bible

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Evidence of Nature's Creation in Holy Bible Its evidence is also present in Holy Bible The Holy Bible has evidence about  who is the Creator of universe and what is He like, and what is His real name? Holy Bible (Genesis, on page no. 2, A. 1:20 - 2:5)  Sixth Day: - Living beings and Man: After creating the other living beings, ◆ Then God said, "Let us make man in our own image, in our likeness, who will rule over all the creatures. ◆Then, God created man in His own image, in His own image God created him; He created human beings as male and female. ◆God has given human beings, every seed-bearing plant on the face of the whole earth and every tree that has fruit with seed in it, as food. (He has not allowed them to eat meat.) Seventh day: - Day of Rest. God created the entire nature in six days and took rest on the sev- enth day. Holy Bible has proved that God has a man- like visible body who created the entire nature in ...

Divine play of God kabir

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  Divine play of God kabir Divine play of God kabir ‘बिल्ली के बच्चों की रक्षा करना’’ प्रहलाद को अक्षर ज्ञान तथा भक्ति ज्ञान के लिए उनके पिता राजा हिरण्यकशिपु ने शहर से बाहर बनी पाठशाला में भेजा जहाँ पर दो पाधे (उपाध्य यानि आचार्य) एक साना तथा दूसरा मुर्का पढ़ाया करते थे। धर्म की शिक्षा दिया करते थे। हिरण्यकशिपु के आदेश से सबको हिरण्यकशिपु-हिरण्यकशिपु नाम जाप करने का मंत्रा बताते थे। कहते थे कि राम-विष्णु नाम नहीं जपना है या अन्य किसी भी देव का नाम नहीं जपना है। हिरण्यकशिपु (हरणाकुश) ही परमात्मा है। प्रहलाद भी अपने पिता का नाम जाप करते थे। यदि कोई हिरण्यकशिपु के स्थान पर राम-राम या अन्य नाम जो प्रभु के हैं, जाप करता मिल जाता तो उसे मौत की सजा सबके सामने दी जाती थी। पाठशाला के रास्ते में एक कुम्हार ने मटके पकाने के लिए आवे में रखे थे। लकड़ी तथा उपलों से ढ़क रखा था। सुबह अग्नि लगानी थी। रात्रि में एक बिल्ली ने अपने बच्चे उसी आवे (मटके पकाने का स्थान) में एक मटके में रख दिए। प्रातः काल बिल्ली अन्य घर में भोजन के लिए चली गई। कुम्हार ने आवे को अग्नि लगा दी।...