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Showing posts from June, 2020

History_Of_JagannathTemple

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History_Of_JagannathTemple एक बार  ”पुरी में श्री जगन्नाथ जी का मन्दिर अर्थात् धाम कैसे बना“ उड़ीसा प्रांत में एक इन्द्रदमन नाम का राजा था। वह भगवान श्री कृष्ण जी का अनन्य भक्त था। एक रात्रा को श्री कृष्ण जी ने राजा को स्वपन में दर्शन देकर कहा कि जगन्नाथ नाम से मेरा एक मन्दिर बनवा दे। श्री कृष्ण जी ने यह भी कहा था कि इस मन्दिर में मूर्ति पूजा नहीं करनी है। केवल एक संत छोड़ना है जो दर्शकों को पवित्रा गीता अनुसार ज्ञान प्रचार करे। समुद्र तट पर वह स्थान भी दिखाया जहाँ मन्दिर बनाना था। सुबह उठकर राजा इन्द्रदमन ने अपनी पत्नी को बताया कि आज रात्रा को भगवान श्री कृष्ण जी दिखाई दिए। मन्दिर बनवाने के लिए कहा है। रानी ने कहा शुभ कार्य में देरी क्या? सर्व सम्पत्ति उन्हीं की दी हुई है। उन्हीं को समर्पित करने में क्या सोचना है? राजा ने उस स्थान पर मन्दिर बनवा दिया जो श्री कृष्ण जी ने स्वपन में समुद्र के किनारे पर दिखाया था। मन्दिर बनने के बाद समुद्री तुफान उठा, मन्दिर को तोड़ दिया। निशान भी नहीं बचा कि यहाँ मन्दिर था। ऐसे राजा ने पाँच बार मन्दिर बनवाया। पाँचों बार समुद्र ने...

#BibleFacts_By_SaintRampalJi

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BibleFacts_By_SaintRampalJi ”पवित्रा बाईबल तथा पवित्रा कुरान शरीफ में सृष्टी रचना का प्रमाण“ इसी का प्रमाण पवित्रा बाईबल में तथा पवित्रा कुरान शरीफ में भी है। कुरान शरीफ में पवित्रा बाईबल का भी ज्ञान है, इसलिए इन दोनों पवित्रा सद्ग्रन्थों ने मिल-जुल कर प्रमाणित किया है कि कौन तथा कैसा है सृष्टी रचनहार तथा उसका वास्तविक नाम क्या है। पवित्रा बाईबल (उत्पत्ति ग्रन्थ पृष्ठ नं. 2 पर, अ. 1ः20 - 2ः5 पर) छटवां दिन :- प्राणी और मनुष्य : अन्य प्राणियों की रचना करके 26. फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं, जो सर्व प्राणियों को काबू रखेगा। 27. तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके मनुष्यों की सृष्टी की। 29. प्रभु ने मनुष्यों के खाने के लिए जितने बीज वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ों में बीज वाले फल होते हैं वे भोजन के लिए प्रदान किए हैं, (माँस खाना नहीं कहा है।) सातवां दिन :- विश्राम का दिन : परमेश्वर ने छः दिन में सर्व सृष्टी की उत्पत्ति की तथा ...

Evidence of Nature's Creation in Holy Bible

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Evidence of Nature's Creation in Holy Bible Its evidence is also present in Holy Bible The Holy Bible has evidence about  who is the Creator of universe and what is He like, and what is His real name? Holy Bible (Genesis, on page no. 2, A. 1:20 - 2:5)  Sixth Day: - Living beings and Man: After creating the other living beings, ◆ Then God said, "Let us make man in our own image, in our likeness, who will rule over all the creatures. ◆Then, God created man in His own image, in His own image God created him; He created human beings as male and female. ◆God has given human beings, every seed-bearing plant on the face of the whole earth and every tree that has fruit with seed in it, as food. (He has not allowed them to eat meat.) Seventh day: - Day of Rest. God created the entire nature in six days and took rest on the sev- enth day. Holy Bible has proved that God has a man- like visible body who created the entire nature in ...

Divine play of God kabir

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  Divine play of God kabir Divine play of God kabir ‘बिल्ली के बच्चों की रक्षा करना’’ प्रहलाद को अक्षर ज्ञान तथा भक्ति ज्ञान के लिए उनके पिता राजा हिरण्यकशिपु ने शहर से बाहर बनी पाठशाला में भेजा जहाँ पर दो पाधे (उपाध्य यानि आचार्य) एक साना तथा दूसरा मुर्का पढ़ाया करते थे। धर्म की शिक्षा दिया करते थे। हिरण्यकशिपु के आदेश से सबको हिरण्यकशिपु-हिरण्यकशिपु नाम जाप करने का मंत्रा बताते थे। कहते थे कि राम-विष्णु नाम नहीं जपना है या अन्य किसी भी देव का नाम नहीं जपना है। हिरण्यकशिपु (हरणाकुश) ही परमात्मा है। प्रहलाद भी अपने पिता का नाम जाप करते थे। यदि कोई हिरण्यकशिपु के स्थान पर राम-राम या अन्य नाम जो प्रभु के हैं, जाप करता मिल जाता तो उसे मौत की सजा सबके सामने दी जाती थी। पाठशाला के रास्ते में एक कुम्हार ने मटके पकाने के लिए आवे में रखे थे। लकड़ी तथा उपलों से ढ़क रखा था। सुबह अग्नि लगानी थी। रात्रि में एक बिल्ली ने अपने बच्चे उसी आवे (मटके पकाने का स्थान) में एक मटके में रख दिए। प्रातः काल बिल्ली अन्य घर में भोजन के लिए चली गई। कुम्हार ने आवे को अग्नि लगा दी।...

Esoteric mystery of emersion of kabir dev

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Esoteric mystery of emersion of kabir dev Esoteric mystery of emersion of kabir dev (kabir das) कविर्देव अपने ज्ञान का दूत बनकर स्वयं ही आता है तथा अपना स्वस्थ ज्ञान (वास्तविक तत्वज्ञान) स्वयं ही कराता है। स्वयं कविर्देव (कबीर परमेश्वर) जी ने अपनी अमृतवाणी में कहा है - शब्द :- अविगत से चल आए, कोई मेरा भेद मर्म नहीं पाया। (टेक) न मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक हो दिखलाया। काशी नगर जल कमल पर डेरा, वहाँ जुलाहे ने पाया।। मात-पिता मेरे कुछ नाहीं, ना मेरे घर दासी (पत्नी)। जुलहा का सुत आन कहाया, जगत करें मेरी हाँसी।। पाँच तत्व का धड़ नहीं मेरा, जानुं ज्ञान अपारा। सत्य स्वरूपी (वास्तविक) नाम साहेब (पूर्ण प्रभु) का सोई नाम हमारा।। अधर द्वीप (ऊपर सत्यलोक में) गगन गुफा में तहां निज वस्तु सारा। ज्योत स्वरूपी अलख निरंजन (ब्रह्म) भी धरता ध्यान हमारा।। हाड़ चाम लहु ना मेरे कोई जाने सत्यनाम उपासी। तारन तरन अभय पद दाता, मैं हूँ कबीर अविनाशी।। उपरोक्त शब्द में कबीर परमेश्वर कह रहे हैं कि न तो मेरी कोई पत्नी है, न ही मेरा पाँच तत्व (हाड-चाम, लहू अर्थात् नाडि़यों के जोड़-जुगाड़...

Discourses Of kabir

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Discourses Of kabir तीनों पुत्रों की उत्पत्ति के पश्चात् ब्रह्म ने अपनी पत्नी दुर्गा (प्रकृति) से कहा मैं प्रतिज्ञा करता हुँ कि भविष्य में मैं किसी को अपने वास्तविक रूप में दर्शन नहीं दूंगा। जिस कारण से मैं अव्यक्त माना जाऊँगा। दुर्गा से कहा कि आप मेरा भेद किसी को मत देना। मैं गुप्त रहूँगा। दुर्गा ने पूछा कि क्या आप अपने पुत्रों को भी दर्शन नहीं दोगे? ब्रह्म ने कहा मैं अपने पुत्रों को तथा अन्य को किसी भी साधना से दर्शन नहींदूंगा, यह मेरा अटल नियम रहेगा। दुर्गा ने कहा यह तो आपका उत्तम नियम नहीं है जो आप अपनी संतान से भी छुपे रहोगे। तब काल ने कहा दुर्गा मेरी विवशता है। मुझे एक लाख मानव शरीर धारी प्राणियों का आहार करने का शाप लगा है। यदि मेरे पुत्रों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) को पता लग गया तो ये उत्पत्ति, स्थिति तथा संहार का कार्य नहीं करेंगे। इसलिए यह मेरा अनुत्तम नियम सदा रहेगा। जब ये तीनों कुछ बड़े हो जाऐं तो इन्हें अचेत कर देना। मेरे विषय में नहीं बताना, नहीं तो मैं तुझे भी दण्ड दूंगा, दुर्गा इस डर के मारे वास्तविकता नहीं बताती। इसीलिए गीता अध्याय 7 श्लोक 24 म...

DivinePlay_Of_GodKabir 3DaysLeft_KabirPrakatDiwas

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DivinePlay_Of_GodKabir 3DaysLeft_KabirPrakatDiwas मीरा बाई को शरण में लेना.... मीरा बाई ने जब अंत में कबीर जी को गुरूबनाया। तब मीरा बाई जी का सत्य भक्ति बीज का बोया गया| "गरीब, मीरा बाई पद मिली, सतगुरु पीर कबीर। देह छतां ल्यौ लीन है, पाया नहीं शरीर।।" #DivinePlay_Of_GodKabir पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब त्रेता में मुनिंदर नाम से प्रकट हुए और हनुमान जी को शरण में लिया सत्य ज्ञान समझाया और सतलोक के दर्शन कराए देखें साधना टीवी शाम 7:30बजे तत्वदर्शीसंत रामपालजी महाराज #DivinePlay_Of_GodKabir द्रौपदी ने अंधे महात्मा को अपनी साड़ी के कपड़े में से टुकड़ा दिया था क्योंकि अंधे महात्मा की कोपीन पानी में बह गई थी। साधु ने आशीर्वाद अनंत चीर पाने का आशीर्वाद दिया। कबीर परमात्मा ने चीरहरण में द्रौपदी का चीर बढ़ाकर लाज बचाया #3DaysLeft_KabirPrakatDiwas